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यही प्यार मुझे पसंद है
- Arun Mishra

- Aug 4, 2020
- 1 min read
Updated: Sep 24, 2020
मुंबई से अमेठी पहुंचे ।
गांव से छोटा भाई आया । प्लेटफॉर्म पर आते ही भाई ने कोई सामान लटकाया, तो कोई सिर पर रख लिया ।
– अरे, ये क्या, तुम तो सारा सामान लाद लिए, कुली बन गए, बैग हमें दे दो ।
– आप ये सब छोड़ो भैया भाभी, मेरे पीछे आओ, (और सामान ले कर भाई चल दिया आगे आगे) ।
न कोई शर्म है कुली बनने में, न कोई झिझक है, न कोई फॉर्मैल्टी है, न कोई लाग लपेट है, न कोई …. ।।
खुली हवा है, खुला संसार है, खुला प्यार है ।।
यही प्यार मुझे पसंद है ।










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