वो वहीं खड़े रहे
- Arun Mishra

- Sep 22, 2020
- 3 min read
जैसे ही आप लखनऊ एयरपोर्ट से बाहर निकलेंगे, आपको टैक्सी वाले आकर पूछने लगेंगे - साहेब फैजाबाद, बनारस, सुल्तानपुर, .. कहाँ जाना है बताइए, हम ले चलेंगे.
इसी 6 ता. को जब मैं पत्नी के साथ बाहर आया तब भी ऐसा ही हुआ. मैंने मुंबई से ही टैक्सी कर ली थी पर किसी कारणवस वो नही आई. पास में खड़े टैक्सी वाले, आपकी हर भाव भंगिमा व मोबाइल पर की जाने वाली बातें बहुत ध्यान से ऑब्सर्व करते रहते हैं. यह उनके व्यवसाय की कला है. एक टैक्सी चालक मेरे करीब आया और बोला - सर, वो नही आ पाया तो कोई बात नहीं, मैं ले चलूंगा, मेरी गाड़ी साफ है, सैनीटाइज़ की हुई है, मैं ब्राह्मण हूँ, शाकाहारी हूँ.मैं सोचने लगा कि इसे ये बताने की जरूरत क्यों पड़ी, फिर ध्यान आया कि शायद मैं किसी से फोन पर बात कर रहा था - हैलो, मैं अरुण मिश्रा बोल रहा हूँ, लखनऊ पँहुच गया हूँ - वहीं से इसने बात पकड़ ली है व same group वाली बात कर रहा है. मैंने पूछा - कितना लोगे ? उत्तर मिला - जितना आप उसे दे रहे थे, उससे 100 कम दे दीजिएगा. मैंने कहा - OK
उसने सामान उठाया व गाड़ी की तरफ चल दिया. टैक्सी में सामान रख दिया. मेरे मुंह से निकल गया कि मैं इन्हें पहचानता हूँ, पत्नी बोली कि आप इन्हें कैसे पहचानते हैं, मैंने कहा - ये पांडे जी हैं.
वो हाथ जोड़ते हुए बोले, जी अंकल जी, मैं पांडे ही हूँ, मेरा नाम कमलेश पांडे है.
हम लोग गाड़ी में बैठ गए. गाड़ी सुल्तानपुर की ओर चल दी.
कुछ देर बाद उससे रहा न गया, उसने पूछ लिया, सर आप को कैसे मालूम पड़ा कि मैं पांडे हूँ, मैंने कहा - दिल ने बताया. सब मुस्कराने लगे. गाड़ी चलती रही.
पांडे जी को फोन किया व 18 ता. को लौटने की यात्रा प्लान की. वे लखनऊ से सुल्तानपुर आए व जहां जहां कहा, गाँव गाँव घुमाते हुए, रिश्तेदारों से मिलाते हुए, वापस लखनऊ लाए. रास्ते मे पत्नी की दादी (बड़ी माँ), मामा मामी, मेरे भाई, मेरे मामा मामी के घर गए व मिले. रात में 9 बजे तक लखनऊ में अपने घर पहुँचे व माँ से मिले.
अगले दिन पत्नी के ममेरे भाई व उसके अगले दिन बहू के घर वालों से मुलाकात थी. 21 को मुंबई की वापसी थी.
पांडे जी ने अपना दिली अधिकार जताते हुए, पहले ही बता दिया कि - अंकल, 21 की सुबह मैं ही आपको वापस एयरपोर्ट ले जाऊँगा.
मेरे लिए कोई ऑप्शन बचा ही नहीं.
ऐसा ही किए. तय समय पर गाड़ी लेकर आ गए. सामान गाड़ी में रखा. गाड़ी चल दी. 20 मिनट में एयरपोर्ट पर पहुंच गए. सामान उतार कर entry gate तक ले आए. जो पैसा दिया, चुपचाप अपनी जेब मे रख लिए, मैंने पूछा - और चाहिए ? 'ना' में गरदन हिलाए, बोले - अंकल ऑन्टी आशीर्वाद दीजिए, झुक कर पैर छुए, अपने आँसू पोछते हुए, हाथ जोड़ कर खड़े हो गए. पत्नी बोली - भैया, आप खुश रहिए, बहुत सारा आशीर्वाद आपको, आपने हमें इतनी जगह घुमाया, सबसे मिलाया, आप सुखी रहिए.
वो वहीं खड़े रहे, मैंने कहा - अब आप जाइए, हम चले जाएंगे. उधर से मौन आवाज आई - अंकल ऑन्टी ध्यान रखिएगा.
हम मुंबई पहुंच गए. 2 बजे घर पहुंच गए. 5 बजे थे, फोन आया, फोन पर कमलेश पांडे लिखा था, उधर से आवाज जी - अंकल जी, आप घर पहुंच गए, ऑन्टी ठीक हैं ? मैंने कहा - हाँ कमलेश, हम पहुंच गए, सभी ठीक हैं । - प्रणाम अंकल - खुश रहो कमलेश.









Comments