महात्मा मेरे मित्र
- Arun Mishra

- Sep 18, 2020
- 2 min read
Updated: Sep 29, 2020
मुंबई के Prabhakar जी महात्मा मेरे मित्र हैं, छोटे भाई हैं, जिगरी दोस्त हैं, दिल हैं । 13 ता. की सुबह जब मैं सुल्तानपुर में अपने विद्यालय के मित्रों के साथ बैठा था, तब खबर मिली कि उन्हें कोरोना हो गया है ।
मैं दुनिया को ज्ञान देता हूँ कि अपने को मजबूत रखो, कॉन्फिडेंस रखो, हिम्मत रखो, आदि आदि । खबर सुन कर सारा ज्ञान फेल होने लगा । पेट मे मरोड़ जैसा होने लगा । मैं समझ गया कि खबर दिमाग पर असर कर रही है, दिमाग शरीर पर असर कर रहा है । मैंने सिर झटका, अपने को मन ही मन समझाया और अपने पर काबू पा लिया ।
तीन बातें समझने वाली हैं ।
पहली - यह क्रिया प्रतिक्रिया 10 सेकंड की थी, अगर समय लंबा हो जाता तो शरीर के दूसरे भागों पर भी असर होता, जैसे कि बीपी बढ़ जाता, धड़कन बढ़ जाती आदि आदि । कई बार कुछ लोगों को यह असर नुकसान दायक हो जाता है ।
दूसरी - जब एक मित्र को ऐसा असर हो सकता है तो बेटा बेटी पत्नी माँ बाप आदि को कितना जादा असर होता होगा । उन्हें अपने को बहुत संभालना चाहिए । दूसरों को भी उन्हें संभालना चाहिए ।
तीसरी - सब मस्त होकर घूम रहे हैं । बोल रहे हैं कि कोरोना वोरोना कुछ नही होता । पर जिसको हो जा रहा है, उसे व उसके परिजनों को ही समझ आ रहा है कि कोरोना क्या होता है । इसलिए सावधानी रखें । इसे हल्के में न लें ।
अभी की सूचना है कि महात्मा जी स्वस्थ हो रहे हैं । 2-4 दिन में पूर्णतः स्वस्थ हो कर घर आ जाएंगे ।
आज की तारीख 25.09.2020 मेरी डायरी की सबसे अच्छी तारीख है.
मेरे मित्र, मेरे भाई, मेरे हनुमान, मेरे दिल, आज स्वस्थ होकर घर वापस आए हैं.















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