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SORRY

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • May 20, 2015
  • 2 min read

SORRY


एक लड़का था । 8वीं में । मेरे साथ । मेरे हॉस्टल बर्मिगटन हाल में । हम सब उसे बरेली कहते थे । असली नाम अब मैं भूल गया हूं । वो बात भी अब भूल गया हूं जिससे वो बरेली मुझ लखनऊ से रूठ गया । या यूं कहो कि लखनऊ बरेली से रूठ गया । आज देखता हूँ तो देखता हूँ कि तब औकात 8 छंटाक की थी और ऐंठ 8 मन की । ऐंठ में किसी ने किसी को मनाया नहीं । 5 साल साथ में रहे । मिलते रहे । साथ में पढ़ते रहे । खेलते रहे । पर कभी बात नहीं की । 12वीं पास हो गए । वो जाने कहां चला गया । हम जाने कहां चले गए । मन में ग्लानि रह गई कि बात नहीं की । आज भी आत्मग्लानि होती है कि काश हमने आगे बढ़ के सॉरी बोल दिया होता और उस कमीने ने गले लगा लिया होता तो साला बार बार यादों में आ के यूँ न रुलाता । खैर, 37 साल बाद आज जब अचानक whatsapp ग्रुप में अपना संजीव मिला, बरेली वाला संजीव चड्ढा, तो मैंने उसे ही पकड़ लिया । फोन किया । उसे सारी कहानी सुनाई । बड़ी मासूमियत से संजीव बोला कि भाई मैं वो वाला बरेली नहीं हूँ । पर मैंने मौका हाथ से ना जाने दिया । जो बरेली पकड़ में आया उसे ही सॉरी ठोक दिया । अब आगे की वो जाने । अपना मन तो हलका हो गया । 🙂


Sorry Friend


संदेश साफ़ है । ये दोस्त बड़े कमीने होते हैं । झगड़ा हो जाए तो भी दिल से नहीं निकलते । दिल में घुसे बैठे रहते हैं । दिल को चिकोटी काटते रहते हैं । दिल को परेशान करते रहते हैं । इसलिए छोटी छोटी बातों को दिल पर लेकर न बैठें । जिंदगी बहुत छोटी है दोस्त । मौका मिलते ही सॉरी बोल दें । गले से लगा लें । बाकी की जिंदगी सुकून से गुजरेगी ।


🙂  🙂  🙂

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