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माँ, तब तू बहुत सुंदर लगती थी

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • Dec 18, 2015
  • 1 min read

मैं तब छोटा था. गर्मी की छुट्टी में मों, पिताजी मेरे को लेकर लखनऊ से रात की पैसेंजर गाड़ी से अमेठी गावं जाते थे. रात तीन बजे गाड़ी पहुँच जाती थी. सुबह सुबह भोर होते ही पिताजी घोड़ा गाड़ी बुला कर लाते थे. हम सब गाड़ी में बैठ जाते थे. माँ घूंघट निकाल लेती थी. मैं उसमे से उसे झांकता था. बहुत सुंदर लगती थी.


कुछ दिनों पहले मैंने माँ को बताया. माँ, तब तू बहुत सुंदर लगती थी.


कब ? वही, जब हम लोग गावं जाते थे…


माँ, मुस्कराने लगी, और पिताजी भी.


अभी माँ, ६५ की है, पर बातें वही हैं, बड़े चाचा दादा आते हैं तो माँ पर्दा कर लेती हैं, या फिर परदे के पीछे चली जाती हैं.


माँ, अभी भी, अभी क्या जरुरत ?

बेटा, वो बड़े हैं, हम इज्जत तो दे ही सकते हैं


माँ, अब भी बहुत सुंदर है.



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