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माँ से मिलन

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • Jan 17, 2017
  • 1 min read

Updated: Aug 7, 2020

माँ से मिलन


… पता था कि बेटा आज आएगा । पता तो 10 दिन पहले से था पर आज माँ का मन नहीं लग रहा था । सुबह से छत पर खड़ी राह देख रही थी । पता था कि 2 बज जाएंगे पर ममता भरी आंखे 10 बजे से सड़क की तरफ देख रही थी ।

- बेटी, कितना बज गए.

- दादी, 12 बजे हैं.

- समय कितना सुस्त हो गया है . चार घँटे हो गए पर अभी 12 ही बजे हैं ….

आंखें सड़क पर जा रही हर गाड़ी को देख रही थी । पास आती हर गाड़ी अपनी लग रही थी. मन खुश होता था. पास आकर वो दूर चली जाती थी. मन दुखी ही जाता था.

बेटी, वो देख, सफेद रंग वाली गाड़ी अपनी गली में मुड़ गई है, भाग, गेट खोल, बड़े डैडी आ गए…. पिताजी के जाने के बाद माँ कमजोर हो गई है.

देखते ही गले लगा ली. रोने लगी. चुप ही न हो. रोती रही. बड़ी देर तक. हम भी रोते रहे. रोते रोते चुप कराते रहे, खुद को भी, उन्हें भी. बड़ी देर तक.


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