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माँ आसूं भर रह जाएगी
- Arun Mishra

- Jun 18, 2015
- 1 min read
माँ, तुझे छोड़ मैं शहर चला जाता हूँ, बार बार, न जाने तू कैसे रहती होगी, बाबूजी हैं, भाई है, पर मैं तो नहीं ।
माँ, तेरी याद में –
कल फिर वही कहानी होगी सुबह नई, पर हवा पुरानी होगी चिड़िया दाना ले के आएगी अपने बच्चों को चुगाएगी बच्चे एक दिन उड़ जाएंगे माँ आसूं भर रह जाएगी










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