कुछ नया करो
- Arun Mishra

- Nov 13, 2015
- 1 min read
हम प्रत्येक दिन नये विचारों के साथ सुबह शुरुआत करते है, कुछ नये सपने, कुछ नये लक्ष्य, कुछ नये विचार.
हमारी सतत् कोशिश है कि हम पहले से बदल जाये, शायद हर दिन कोई नया अविष्कार हो जाता है, कोई नयी उत्पाद तकनीक विकसित हो जाती है, कोई लेखक कुछ लिखकर जीवन को नया संदेश दे जाता है, या कोई नई फिल्म हमारे विचारो को झकझोर जाती है. हम क्रियेटिव है और हमारी प्रकृति भी यही करती, रोज़ नये फूल खिलते है, चिड़िया नया घरोंदा बनाती है, नदी नया रास्ता तलाशती है, पहाड़ नये बादलों के घर बन जाते है, नये रंग के फूल, नई खुशबू, नई तितली और भंवरे, काल वाली हवा कभी नहीं रहती, मुझे सूरज मे हर रोज़ नये रंग, उर्जा दिखती है, फिर प्रकृति का बहुत सूक्ष्म हिस्सा मानव बदलता है, जो नहीं बदलता वह रूका हुआ जल है, जिसमे काई लग जाती है. इसलिये रचनात्मक बनिये, कुछ नया करो वर्ना एक दिन तो इस मिट्टी हिस्सा बन जाओगे, वक्त कम है आज ही तय करें.
१. आज़ कुछ नया काम करें जो कल नहीं किया था.
२. कोई नया मित्र बनाये.
३. कोई नई किताब पढ़े या कोई नई फिल्म देखे.
४. किसी की मदद करे और मदद करने की आदत बनाये.
५. कोई नया पौधा लगाये.
६. अपने लिये और दूसरो के लिये प्रार्थना करे.
७. किसी परेशानी को सामूहिक विचार मंथन से दूर करें.
८. अपने जन्मदाता के एहसान दोहराये.
अपने आप से प्यार करो,
परायो से ज्यादा प्यार करो,
धरा से प्यार करो,
हवा से प्यार करो,
एक दिन यहाँ से जाना हैं,
जाने से पहले सुगंध बनो,
फूल बनो, वृक्ष बनो,
रास्ता बनो, रोशनी बनो,
इंसान बनो, सूरज बनो,
रक्त से नफ़रत करो,
हथियारो को फेक दो,
फूल से प्यार करो.









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