top of page

कछुआ मत बनिए, तेज होइए, आगे बढिए !

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • Feb 19, 2015
  • 1 min read

एक कछुआ था । एक खरगोश था । दौड़ हुई । खरगोश आगे था । रुक कर आराम करने लगा । धीमे धीमे कछुआ चलता रहा । वह आगे निकल गया । जीत गया ।


समय बदल गया । फिर से दौड़ हुई । इस बार फिर से खरगोश आगे निकल गया । पर अब खरगोश होशियार हो गया था । अबकी रुका नहीं । दौड़ता रहा । और आगे ही बना रहा ।




जमाना बदल गया है । अब कोई रुक कर आराम नहीं करेगा । सोएगा नहीं । आप को कोई यूँ ही आगे नहीं निकलने देगा । आप को स्वयं तेज होना पड़ेगा । ज्ञान में तेज । कर्म में तेज । टेक्नोलोजी में तेज । आचार व्यवहार में तेज । बोल चाल में तेज ।

कछुआ मत बनिए ।


तेज होइए । आगे बढिए ।

Comments


ArunMishra1.jpg

Dr. Arun Mishra

Read the blog, enjoy, write your comments, ask your questions, we will happy to discuss with you.

Let the posts
come to you.

Thanks for submitting!

  • Facebook
  • Instagram
  • Twitter
  • Pinterest

Let me know what's on your mind

Thanks for submitting!

© Life Success Mantra

bottom of page