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जीवन की बगिया महकेगी

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • Nov 28, 2016
  • 1 min read

यादें


जब मैं और बेटे की माँ बेटे को 2011 में इंजीनियरिंग हॉस्टल में छोड़ कर लौट रहे थे, तो कार में fm पर ‘जीवन की बगिया महकेगी …’ व ‘तुझे सूरज कहूँ या चंदा …’ गाना आने लगा । बहुत इमोशनल गाने ऐसे इमोशनल समय पर दिल को छू गए । बेटे की माँ आंसुओं में बहने लगी । मैं भीगे मन से बहुत देर तक चुपचाप कार चलाता रहा । 12 साल की बेटी साथ थी । कभी मुझे देख रही थी कभी माँ को ।


आज वो बेटा इंजीनियर बन गया है और ‘मुंबई मेट्रो’ में ‘जे कुमार इंफ्रास्ट्रक्चर’ से कार्यरत है ।


वो गाने, वो यादें, वो पल …



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