इंसान के अंदर इंसान
- Arun Mishra

- Jan 20, 2018
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बैठे बैठे सोचा कि फेसबुक फ्रेंड बहन शालिनी जी का इंटरव्यू ले लूं । उनको पढ़ता आया हूँ । मस्त, बेफिक्र, बेबाक, निडर – यही इमेज थी उनकी मेरे दिमाग में । इंटरव्यू के बाद इस इंसान के अंदर एक नया इंसान मिला मुझे । आप भी मिलिए उस नए वाले इंसान से ।।
- लिखना आप का शौक है । आप कब से लिख रही हैं ?
- जी, जबसे फेसबुक हिंदी मे ईजाद हुआ
- लिखने से आपको सबसे ज्यादा क्या मिलता है : आनंद, संतोष, सकारात्मकता, ऊर्जा, … ?
- आसंसऊ = मजा (आनंद)
- लिखने के अलावां आप की रुचि किसमे है ?
- रसोई में, व्यंजन पकाने में
- अगर आपको मौका मिला तो क्या आप दूसरों को सिखाना पसंद करेंगी ?
- ‘सिखाना’ मेरा विषय नही है । मेरा विषय सीखना है । बहुत कुछ सीखना है ।
- आपकी ये बात भी अच्छी है । हमारी प्रकृति के पास बहुत कुछ है सीखने के लिए ।
- आप को दो कलाओं में महारत है, लिखने में व भोजन बनाने में । इन दोनों कलाओं से इंसान दिल में उतर जाता है । पहली कला से आप पाठक के मस्तिष्क से हो कर दिल में उतर जाती हैं । दूसरी कला से आप जुबान के स्वाद से होते हुए दिल में उतर जाती हैं । आप ने दिल तक पंहुचने के रास्ते खोज लिए हैं ।
- आऐ हाऐ
- इसके अलावां दिल तक पहुंचने के और कौन से हुनर हैं आप के पास ?
- जिस काम से आत्मसंतुष्टि मिले, वही मुझे अच्छा लगता है । आत्मसंतुष्टि में खुशी है, सुख है ।
- प्रकृति में बहती नदी के अलावां आप को अन्य किस चीज से प्यार है ?
- गंगासागर
- वाह । बहुत सुंदर । कैसी रही सागर में सागर, गंगा सागर की यात्रा ।
- आनंदमयी रही । अच्छी रही । एक और यात्रा चल रही है । तजुर्बो की यात्रा । भले मुकाम न मिले, लेकिन ये यात्राएं जीवन में चलने का सलीका जरूर सिखा देती है ।
- अगले 5 वर्षों में आप क्या चाहेंगी ?
- आबू रोड जाना (स्वामी गणेशानन्द के पास), कैंची आश्रम, न्याग्ररा फाल्स, एंडीज की चितकबरी चोटियो पर चढना …………
- कैची आश्रम मैं कई बार गया । मैं नैनीताल में पढ़ता था । हमारे बैच मेट्स की सालाना मीटिंग होती है नैनीताल में । तभी हम कैची आश्रम भी जाते हैं । बहुत शांत जगह है । आप एक बार जरूर जाइए ।
- आपका आशीर्वाद रहा तो अवश्य प्रयास सफल होंगे
- अबू रोड (स्वामी गणेशानंद जी) जब जाइएगा तो बताइएगा । हो सकेगा तो हम भी साथ देंगे । मुंबई से आएंगे और वहां मिल जाएंगे । मिल जाएंगे आपसे, आध्यात्म के बहाने ।
- आहा, बढिया
- आध्यात्म को आप कैसे देखती हैं ?
- ज्ञान और आत्मा का मिलना आध्यात्म है । आत्मा के लिऐ सिर्फ “मै” से मुक्त होना ही बहुत है, शेष सब स्वतः ही सिद्ध होने लगेगा ।
- बहुत अच्छा लगा शालिनी जी आपसे बात करके । मैंने बहुत कुछ सीखा आपसे ।
इस साक्षात्कार में मैंने आपको पाया –
शा – शांत प्रिय
लि – लीलाधर प्रिय (कृष्ण प्रिय, ईश्वर प्रिय)
नी – निरंकार प्रिय (प्रकृति प्रिय)









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