top of page

भावुक होली : सामाजिक प्यार

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • Mar 7, 2015
  • 5 min read

बात 5 तारीख की है । मुंबई से भोपाल पहुंचा । सुबह के 10 बज रहे थे । प्लेटफॉर्म 5 की तरफ से बाहर निकला । बहुत सारे ऑटो वाले खड़े थे । अधिकतर दाढ़ी व टोपी लगाए मुस्लिम भाई थे । सीढ़ियों से उतरने वाले हर मुसाफिर से आग्रह कर रहे थे । यह सब तो हर स्टेशन पर होता है । यहां कुछ अलग था । उनकी जुबान मीठी थी । आवाज में आग्रह था । एक बड़े से मोटे से एजेंट के पास चला गया ।


मैंने बोला – गांधीनगर वो बोला – ठीक है साहब । कितना ? 200. जादा है दोस्त ? साहब एक और बैठा लेंगे 150 दे देना । ठीक है ।


उसने एक 55 साल के दुबले पतले ड्राईवर को बुलाया । बोला, ले जाओ साहब को । उसके ऑटो में पहले से एक महिला बैठी थी । साड़ी पहने पढ़ी लिखी दिख रही थी । ड्राईवर ने बड़ी इज्जत से पूछा, मैडम, साहब को भी बिठा लें । वो बोली ठीक है, कहाँ जाएंगे ? ड्राईवर ने बताया – भैया गांधीनगर जाएंगे । ऑटो चल दिया । सड़क और शहर चलने लगा । इमारते भागने लगी । मैंने बात चालू की ।


मैं – ये इमारत किसी का महल है ? ऑटोवाला – ये मस्जिद है । बहुत बड़ी है । एसिया में सबसे बड़ी । मैं – वाह । मैं – ये झील है ? ऑटोवाला – जी, बहुत बड़ी है । मैं – मुझे RKDF university ले चलना । ऑटोवाला – जी साहब

लेडी – You are in education ? मैं – जी, मुंबई से हूँ । यहां यूनिवर्सिटी में किसी से मिलने आया हूँ ।

लेडी मुझसे इंग्लिश में बात करती थी । और मैं जबाब अंग्रेजी या हिंदी में देता था ।

मैं – कहीं रंग नहीं दिख रहा ? होली की हवा नहीं दिख रही । ऑटोवाला – ये बड़ी सड़क है । गलियों में बच्चे गुब्बारे चलाते हैं । यहां रंग पंचमी जादा मनाई जाएगी । होली से जादा । अब साहब, लोगों के दिलों में वो मुहब्बत नहीं रही 🙂 मैं – सही बात कह रहे हो भाई ।


यूँ ही हलकी फुलकी बात चलती रही । थोड़ी देर बाद हम गांधीनगर के करीब पहुँच गए ।


ऑटोवाला – साहब, सिस्टर को चर्च छोड़ दें फिर आप को आपकी जगह छोड़ देंगे । 10 मिनट लगेगा, सिस्टर को जल्दी है ।

आवाज के अंदाज़, बात करने की नजाकत, और आग्रह में बड़ा दम होता है । आप अक्सर झुक जाते हैं । मैं भी झुक गया, बोला ठीक है ।


चर्च आ गया । सिस्टर ने बताया कि यह नहीं आगे वाला चर्च है । उन्होंने पुराना नहीं कुराना गावं वाला चर्च कहा था । ऑटोवाला समझ गया कि सिस्टर के बोलने व उसके सुनने में फर्क आ गया है । बड़ा सीधा बंदा था । कुछ नहीं बोला 3 किमी और आगे ले गया । चर्च आया । सिस्टर उतर गई । तय पैसा दे दिया । हम किसी से manners में कम कहाँ 🙂 मै ऑटो से उतरा । सिस्टर को झुक कर bye bye किया । वो चर्च मे चली गई । हम वापस चल दिए । मैं देख रहा था कि ऑटोवाले का 6 किमी का खर्चा बढ़ गया पर उफ़ तक नहीं किया । अच्छी बातें, अच्छे अंदाज, नेक नीयत …. मेंरा दिल पिघलने लगा । 15 मिनट बाद मैं भी पहुँच गया यूनिवर्सिटी गेट के सामने । ऑटो से उतरा ।


ऑटोवाला – साहब आप वापस भी जाएंगे ।

मैं – हाँ, पर 1 घंटा लगेगा । तुम इंतजार ना करो कोई सवारी मिले तो ले जाओ । अपना नुकसान ना करो । ये लो 200 रु ।

ऑटोवाले ने 50 रु वापस करने के लिए जेब में हाथ डाला ।


मैं – रख लो । ये प्यार से है तुम्हारे लिए ।


ऑटोवाला भावुक हो गया । आवाज कह रही थी की उसका दिल भर गया ।


ऑटोवाला – साहब, मैं इंतजार करूंगा । देर लगेगी तो को कोई बात नहीं । शाम तक यहीं खड़ा रहूँगा ।


मैं मुस्काराया और युनिवेर्सिटी चला गया । जिनसे मिलना था उनसे मुलाकात हुई । बहुत बड़े थे वो । बहुत सम्मान किया उन्हों ने । जितना सोचा था उससे जादा सफल रही मीटिंग । आशा से बहुत जादा । चलते चलते वो बोले कि गाड़ी स्टेशन छोड़ कर आएगी । मैंने विनम्रता से कहा कि किसी ऑटोवाले से वापस जाने का वादा किया है ।वह इंतजार कर रहा हो गा । मान गए फिर भी गेट तक गाड़ी से भिजवाए । वहां ऑटो वाला इंतजार कर रहा था । बोला, साहेब, गाड़ी साफ कर दी आपके लिए । मैं बैठ गया । फिर शहर भागने लगा ।


हमेशा साए की तरह साथ रहने वाली पत्नी जी का फोन आ गया ।


पत्नी – नाश्ता किया ?

मैं – नहीं, तुम्हे तो मालूम है, पहले काम फिर खाना । काम हो गया । सब अच्छा हो गया । अब नाश्ता करूँगा ।


ऑटोवाले ने बात सुन ली । ऑटो चलता रहा । बातें होती रही । मैं जान चुका था कि ऑटो किराए का है, एक लड़का है, 3 लड़कियां हैं, दो की शादी हो चुकी है, इसी ऑटो से कमा कर, एक की शादी एक साल पहले हुई है, दामाद अच्छा मिला है, अल्ला का रहम है, कोई खराब लत नहीं है, तीसरी की शादी इस अप्रैल में है ….


एक शाकाहारी होटल के सामने ऑटो रुक गया ।


ऑटोवाला – इस होटल में अच्छा वेज खाना मिलता है । ठीक सामने 5 मिनट चलें गे तो स्टेशन है । वो सामने दिख रहा है । मैं – जेब से 200 रु निकाले । दे दिया । रख लो । प्यार से दे रहा हूँ ।

ऑटोवाला – कुछ न बोला, भावुक हो रहा था ।


मैं – जेब से 100 रु निकाले और उसके हाथ में रख कर बोला – ये तुम्हारी बेटी की शादी के लिए है । अप्रैल में नहीं आ पाउंगा । इसलिए अभी ही ।

ऑटोवाला – गला रुंध गया, आवाज भारी हो गई, आवाज़ में कंपन आ गई । नहीं साहेब, हम ना लेंगे, आप का लंबा सफर है, रास्ते में लगेगा, आप को कम पड़ जाएगा, हम न लेंगे ।

मैं – मुस्कराया और बोला कि हम लोगों में बेटी को देते हैं । यह मेरा प्यार है । रख लो ।

ऑटोवाला – साहेब, आप मेरा नंबर लिख लो, नाम अली लिख लो, जिंदगी में जब भी आना मुझे फोन करना, मैं आऊंगा । जिंगदी भर आपके लिए खड़ा होऊंगा । कहीं भी कभी भी । अल्ला आपको कामयाब बनाए । सब तकलीफें दूर हों ।


उसकी आवाज उसके अंदर से आ रही थी । गला रुंध चुका था । आँखे गीली थी । मै जैसे ही मुड़ कर चला –

साहेब, रुकिए, हमको आता नहीं है, वो क्या कहते हैं, “बेस्ट ऑफ लक, सर” । और उसकी आँखे रोने लगी ।



Comments


ArunMishra1.jpg

Dr. Arun Mishra

Read the blog, enjoy, write your comments, ask your questions, we will happy to discuss with you.

Let the posts
come to you.

Thanks for submitting!

  • Facebook
  • Instagram
  • Twitter
  • Pinterest

Let me know what's on your mind

Thanks for submitting!

© Life Success Mantra

bottom of page