top of page

बेचारा आदमी

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • Apr 1, 2020
  • 2 min read

गौरीगंज, अमेठी के गांव से मुंबई में आकर आदमी काम करने लगा । शादी हो गई । बच्चे हो गए । स्थिरता के लिए उसने फ्लैट ले लिया । एक दूकान ले ली । ऑफिस खोल दिया । लोगों ने कहा समृद्धि आई है । तालियां बजी । बजती तालियों से खुशी हुई । खुशी खुशी में माया मोह का जाल फैलता गया । बच्चे बड़े हो गए । उनका कॉलेज, उनका जॉब, उनका कैरियर । अब बच्चे मुंबई छोड़ना नहीं चाहते । उनके अपने सपने हैं, उनकी अपनी मजबूरियां हैं । सपने भी हैं और मजबूरियां भी । काम नहीं करेंगे तो कैसे जीवन चलेगा । बस यही यथार्थ सब प्रश्नों को चुप करा देता है । बेचारा आदमी चुप हो जाता है ।


उधर माँ बाप गांव नहीं छोड़ना चाहते । मुंबई का फ्लैट उन्हें पिंजरा लगता है । पिंजरा तो आदमी को भी लगता है । पर आदमी को पिंजरे में रहने की आदत पड़ गई है । वो आए कुछ दिन जैसे तैसे पिंजरे में रहे, चले गए । बेचारा आदमी चाह कर भी उन्हें नहीं रोक पाया । स्वयं नहीं तो कम से कम माँ बाप ही पिंजरे से आजाद रहें, खेत खलिहान गांव देश की खुली हवा में रहें । यही सोच कर आदमी मनमसोस कर शांत हो गया ।


बेचारा आदमी, अपने ही फैलाए जाल में फंस गया ।


एक दिन गांव में रह रहे पिताजी दुनिया छोड़ कर चले गए । आदमी समय से नहीं पहुंच पाया । आदमी था, जिम्मेदारी थी, सब को संभालना था, रो भी नहीं पाया बेचारा !


आदमी को मालूम है कि माँ बूढ़ी है । गांव नहीं छोड़ेगी । पिताजी चले गए पर उसके लिए अभी भी वो वहीं हैं । छोटा बेटा साथ में है, पर वो भी अपनी पारिवारिक समस्यायों में उलझा है । आदमी मुंबई में, अपने फैलाए जाल में, अभी भी फंसा है । वह जानता है कि उसे क्या करना चाहिए । वह जानता है कि समय को किसी ने नहीं देखा । वह जानता है कि वह काम और परिवार में फंसा है और पुत्र धर्म नहीं निभा पा रहा है । बेचारा आदमी सब जानते हुए, चाह कर भी, कुछ नहीं कर पा रहा

घर घर की कहानी है । पैसे और परिवार ने बहुत लाचार बना दिया है आदमी को ।


Comments


ArunMishra1.jpg

Dr. Arun Mishra

Read the blog, enjoy, write your comments, ask your questions, we will happy to discuss with you.

Let the posts
come to you.

Thanks for submitting!

  • Facebook
  • Instagram
  • Twitter
  • Pinterest

Let me know what's on your mind

Thanks for submitting!

© Life Success Mantra

bottom of page