बहुत प्यारी हो तुम मीनू
- Arun Mishra

- Dec 19, 2016
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किससे करें शिकायत हम दोनों एक दूसरे की ।
मम्मी पापा से कर नहीं सकते, वो दुखी हो जाएंगे, खामखां । बात कोई गंभीर तो है नहीं, ये तो बस यूँ ही बात-बे-बात है, फिर उन्हें काहे दुखी करना बेवजह ।
भाई भौजाई से ? नहीं नहीं । वो सीरियस बेमतलब हो जाते हैं बेचारे ।
रिश्ते नाते से ? नहीं नहीं । बेकार का परपंच हो जाता है ?
फिर किससे ?
पत्नी की भतीजी है Richa । हम सब उसे मीनू कहते है । पत्नी उसकी बुआ हुई और मैं फूफा । पत्नी ने बचपन में पढ़ाया, जो पढ़ते पढ़ते जाने कब बड़ी हो गई और गांव में बच्चों को पढ़ाने लगी, सरकारी पाठशाला में प्रधानाध्यापक हो गई, बुआ जी को बहुत प्यार करती है, और फूफा जी को बुआ जी से जादा प्यार करती है, सम्मान देती है, इज्जत देती है ।
जब हमको बच्चा बनना होता है, एक दूसरे की चुगली करनी होती है, या शिकायत करनी होती है तो हम अपनी मीनू को फोन करते हैं और शिकायत कर डालते हैं ।
…. मीनू, देख लो अपनी बुआ को, चाय बनाई है मैंने, पिला रहा हूँ पर नखरे दिखा रही हैं, पी नहीं रही हैं …
…. क्यों बुआ, काहे नखरा दिखा रही हो
…. मीनू, मुझे मालूम था, तुम भी अपने फूफा की तरफ से बोलोगी, पर सुनो, मैंने उन्हें कहा था सुबह जल्दी उठा देना, पर उठाए नहीं, अब तुम्ही बताओ ….
बेचारी मीनू, अपने स्कूल के बच्चों को संभाले कि हम जैसे बच्चों को ….
बस यूँ ही याद आ गई, तो सोचा आज महफिलेआम बात कर लें तुमसे बुआ और फूफा और कह दें …
बहुत प्यारी हो तुम मीनू !
बुआ और फूफा
* रेणु और अरुण *









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