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Atal Darshan
- Aug 20, 2018
- 1 min read
कल अटल जी के लखनऊ से द्विवेदी जी का फोन आया और नम दिल से उन्होंने बताया कि वर्षों पहले, कैसे उन्होंने बतौर सामान्य कार्यकर्ता, मवैया के कार्यक्रम में दरियां बिछाईं व अटल जी के करीब से दर्शन किए. यह बताते बताते उनकी आवाज रुंध गई, दिल भर आया.
यह मेरा फिलोसोफिकल विचार है कि हमारे माता पिता बड़े व पूर्वज ही हमारे भगवान होते हैं. प्रभु राम भी इसी विचारधारा से हमारे प्रभु हैं.
द्विवेदी जी, यह आप का सौभाग्य है, कि आपको प्रभु के साक्षात दर्शन मिले. अपने सौभाग्य पर गर्व कीजिए और अटल पथ पर चलते रहिए.
जब आप मुंबई आएंगे, तब हम आपके दिल को छुएंगे, उन पलों की खुशी की कुछ और बातें करेंगे.




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