मन, उस रिक्तता में, उन्हें ढूंढ़ता रहा 💐
- Arun Mishra

- Jan 20, 2023
- 2 min read
मन, उस रिक्तता में, उन्हें ढूंढ़ता रहा 💐
अपने भतीजे मानस के घर गया था, 14 दिसंबर 2022 की बात है, रात के 10 बजे थे, 25 वर्षीय मानस प्रयाग स्टेशन लेने आया था, उसकी बुआ, फूफा (मैं) व मेरी माँ, उसकी गाड़ी में बैठ गए, 10 मिनट में घर पहुँच गए, घर पर मानस की सरल विनम्र धर्मपरायण माँ थी, इस माँ ने 7 बच्चों को पाला, संस्कार दिए, घर परिवार संभाला, 5 बच्चों का विवाह कराया, उनका संसार बसाया, घर मे मानस के पिताजी थे, पिताजी अपने जमाने में स्कॉलर रहे हैं, रेलवे में अधिकारी रहे हैं, सेवानिवृत्त होने के बाद अपना पब्लिकेशन कार्यालय चला रहे हैं, सरकारी व प्राइवेट, हिंदी की पुस्तकें व मैगजीन पब्लिश करते हैं, हिंदी की सेवा करते हैं, मानस की माँ के दर्शन हुए, पिताजी के दर्शन हुए, पर उनके दर्शन नही हुए, जिनके दर्शन 2013 में मैंने इसी घर मे किए थे, मैं सोफे पर बैठा था, सामने एक बिस्तर था, बिस्तर पर मानस के दादा जी बैठते थे, आराम करते थे, आज वो नही दिख रहे थे, दिमाग जानता था कि कई वर्षों पहले, वो इस लोक से विदा लेकर ईश्वरीय लोक को चले गए हैं, हमारी आँखों मे वह शक्ति नही है कि हम उस लोक तक देख सकें, इसलिए अब उनके साक्षात दर्शन नही हो पाएँगे, पर दिमाग की सुनता कौन है, मन तो उन्हें देखना चाहता था, वहीं, उसी रूप में, जिस रूप में उसने 2013 में देखा था, उनका आशीर्वाद लिया था, पर आज वो वहाँ नही थे, बस एक रिक्तता थी, मन, उस रिक्तता में, उन्हें ढूंढ़ता रहा ।
दूसरी सुबह गंगा मैया के दर्शन किए, संगम में स्नान किया, बड़े हनुमान जी के दर्शन किए, अलोपी मंदिर गए, अलोपी देवी के दर्शन किए, वापस घर आए, सोफे पर बैठे, सामने देखा, अभी भी वो रिक्तता थी, और मन, उस रिक्तता में, उन्हें ढूंढ़ता रहा ।
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