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Don’t Worry

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • Feb 20, 2018
  • 1 min read

दुबे जी सुबह सुबह चाय की दूकान पर बैठ जाते थे. सब को बताते थे कि दुनिया खतम होने वाली है. वैसे ही जैसे जब हम छोटे थे तो अफवाह फैली थी कि स्काई लैब गिरने वाला है और आधा हिंदुस्तान खतम हो जाएगा. समाचार पत्र रोज वो खबर छापते थे और देश दुनिया को डराते थे. भावनाओं की बाज़ार में डर भी एक बिकने वाला मसाला है. डरा कर समाचार बिकता है. डरा कर सामान भी बिकता है. सारे इन्सुरेंस डरा कर ही बेचे जाते हैं.


खैर, मैं कह रहा था कि दुबे जी अपनी डरावनी खबर सुनाते थे. चाय पीते थे. मुस्कराते थे. चलेजाते थे. बाकी लोग दुनिया की खात्मे की चिंता से चिंतित बैठे रहते थे.


एक दिन मैंने चाय वाले से पूछ लिया – गुप्ता जी, ये बताइए, दुबे जी को ये खबर कहाँ से मिलती है कि दुनिया खतम होने वाली है  गुप्ता जी बोले – आप परेशान न हों, कहीं से नही मिलती कोई खबर, ये तो यूँ ही अपनी चिंता दूसरों के देकर, स्वयं चिंतामुक्त हो जाते हैं. छोड़िए, आप चाय पीजिए.

आप लोग भी चिंता न करें. जिसे जादा चिंता हो रही हो, चाय की दूकान पर जाए, अपनी चिंता सब को सुना दे, स्वयं आराम करे, खुश रहे, प्रसन्न रहे.


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