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अफ़सोस मत कीजिए : जीवन खुश बनाइए

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • Mar 20, 2015
  • 2 min read

गलती हर एक से होती है. कई बार अपनी वजह से होती है. कई बार दूसरी वजहों से होती है. कई बार बिना वजह भी होती है. गलती से हमें नुकसान भी हो जाता है. या दूसरे को नुकसान हो जाता है. और फिर अफ़सोस होता है. अपनी गलती से उनका चश्मा टूट गया. बहुत दुःख हुआ. चश्मा बनवा कर दिया पर अफसोस न गया. बाजार में चोर पैसा चुरा ले गया. अपनी गलती नहीं थी पर नुकसान की वजह से अफसोस हुआ. ऐसी घटनाओं के उदाहरण अनेक हो सकते हैं, कारण अनेक हो सकते हैं. कई बार नुकसान जादा हो जाता है और अफसोस लंबे समय तक बना रहता है.


अफसोस एक बार कीजिए, दो बार कीजिए, पर बार बार मत कीजिए. जो होना था हो गया. समय आपके साथ नहीं था. समय आपके साथ होता तो घटना होती ही नहीं. आप उस घटना से सबक ले लीजिए. सावधान हो जाइए जिससे दुबारा वैसी घटना न हो. घटना से नुकसान अपना हुआ है तो सह लीजिए. जीवन में नुकसान फायदा होता रहता है. नुकसान दूसरे का हुआ है तो माफी मांग लीजिए, नुकसान कि जहां तक हो सके उसकी भरपाई कर दीजिए. यही प्रायश्चित है. अब आगे के काम में लग जाइए.


लगातार अफसोस करते रहने से आप अंदर से कमजोर हो जाएंगे. दुःख ही दुःख दिखेगा. जीवन दुखी हो जाएगा.

अफसोस मत कीजिए, जीवन में आगे बढ़िए


अगर घटना बड़ी है और दिमाग से बात नहीं निकल रही तो धार्मिक प्राश्चित कीजिए. पुरानी बात है. मेरी दादी जी ने बिल्ली को डंडा फेक कर मारा कि वो भाग जाए. वो डंडा फेकती थी पूरब और जाता था उत्तर. क्या मालूम वो जान बूझ कर ऐसा करती हों कि किसी को लगे नहीं और कोई नुकसान न हो. पर घड़ी ही खराब थी. बिल्ली को डंडा छू गया. बिल्ली भाग गई. पर दो दिन बाद कमली ने बताया कि घर के पीछे बिल्ली मरी मिली. अब तो दादी के प्राण ही निकल गए. माथा पकड़ के बैठ गई. हो न हो, बिल्ली को उस डंडे से ही चोट लगी, और वो मर गई. पाप हो गया. दादी बहुत दुखी हो गई. अफसोस हो गया. उनकी तबियत खराब होने लगी. पंडित जी बुलाए गए. पंडित प्रायश्चित का धार्मिक उपाय बताया. पूरा घर धोया गया. आँगन गोबर से लीपा गया. सब दादी ने स्वयं किया. पूजा हुई. गावं वालों को साग पूड़ी खिलाया गई. दादी ने एक मन धान और एक मन गोहूँ पंडित जी को दान दिया. प्रायश्चित सफल हुआ. अफसोस जाता रहा.


धार्मिक अफसोस के तरीके अलग अलग हो सकते हैं, पर सफल होतें हैं. क्योंकि उन तरीकों को तपस्या होती है, साधना होती है, पूजा होती है, जन कल्याण होता है, धार्मिक सामाजिक दंड होता है.


घटना कितनी भी बड़ी क्यों न हो, प्रायश्चित किया जा सकता है और अफसोस या दुःख से बाहर निकल कर आगे का जीवन success व खुशी से जिया जा सकता है.


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Dr. Arun Mishra

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