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Advice to Parents

  • Writer: Arun Mishra
    Arun Mishra
  • Aug 4, 2020
  • 2 min read

पैरेंट्स के लिए


आजकल रिजल्ट आ रहे हैं. बच्चों के 80-90 % मार्क्स देखकर पेरेंट्स गदगद हो जा रहे हैं. ऐसा होना स्वाभाविक भी है.

उनके जमाने में 60-70 बहुत होता था. इसलिए 80-90 उन्हें बहुत जादा दिखता है. उन्हें बच्चा स्कॉलर नजर आने लगता है. अधिकतर cases में यह सत्य नही है. बदले समय में मूल्यांकन प्रक्रिया भी बदल गई है. अब छोटे व ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न जाता होते हैं. पार्शियल मार्किंग सिस्टम भी काम करता है. जैसे कि आधा सही तो आधे मार्क्स दे दिए जाते हैं. इस तरह 80-90 मार्क्स बहुत कठिन नही रह गया है. इन बच्चों को मैं स्कॉलर न कह कर, above average कहना जादा पसंद करूंगा.

यह सब मैं इसलिए लिख रहा हूँ, जिससे पेरेंट्स बात को समझें व बच्चे का सही मूल्यांकन करें व आगे का भविष्य उसी प्रकार प्लान करें.

भविष्य प्लान करते वक्त केवल मार्क्स पर न जाएं, उसकी रुचि पर भी जाएं, उसके रुझान पर भी जाएं, उसके अन्य गुणों पर भी जाएं.

कल एक बच्चे के पैरेंट्स आ कर कह रहे थे कि उनका लड़का 10th में 92% लाया था पर 12th में 80 ही लाया और अब इंजीनियरिंग में पहले साल में फेल हो गया. मैंने पूछा कि ऐसा कैसे हो गया तो कहने लगे कि कुछ हायर एजुकेशन सिस्टम खराब है और कुछ लड़के के दोस्तों ने बिगाड़ दिया. उनको मैंने बाहर भेज दिया, लड़के से अकेले में बात की. लड़के ने कहा कि पापा समझते नही, 10th 12th के मार्क्स को लेकर बैठ जाते हैं, पर तब आसानी से मार्क्स मिल जाते थे, एक आधा लाइन लिखने पर भी एक आधा मार्क्स मिल जाता था, अब नही मिलता, अब आधा पेज लिखना पड़ता है, कभी कभी एक ही प्रश्न का उत्तर दो तीन पेज का होता है, अब अलग सिस्टम है, जिसकी हमें प्रैक्टिस नही है, जो हमें भारी पड़ रहा है, पर पापा समझते ही नही. Level of difficulty भी बढ़ गई है, तब calculas बहुत आसान थी, अब बहुत कठिन हो गई है. मैंने कहा – अगर समय दिया जाए तो कर पाओगे या quit करना चाहोगे. वो बोला – एक बार और try करूंगा, अगर फिर भी नही हुआ then I will prefer to change to some other field, may be management. मैंने उसे बाहर भेज दिया, पैरेंट्स को बुलाया, समझाया, समझाया कि 10th 12th अलग बात थी, अब अलग बात है, तब घोड़ा मैदान में दौड़ रहा था, अब घोड़े को रेगिस्तान में दौड़ना है, रेगिस्तान वाला घोड़ा बनने में समय लगेगा, उसे एक साल और प्रयास करने दीजिए. वो मान गए. पैरेंट्स को समझना होगा कि न तो हायर एजुकेशन सिस्टम खराब है और न ही संगी साथी खराब हैं. आपका बच्चा अब रेगिस्तान पार करने जा रहा है, सागर पार करने जा रहा है, पहाड़ पार करने जा रहा है, कठिनाई आएगी, उसके लिए उसे तैयार कीजिए.

पहले की यात्रा मत देखिए, आगे का सफर देखिए. सफलता मिलेगी.


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Dr. Arun Mishra

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